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Old 03-06-2018, 10:44 AM
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Default भाई और छोटी बहन

भाई और छोटी बहन
मेरा नाम अमित है, मुंबई में रहता हूँ, उम्र 21 साल है। पिछले साल मैं अपने मौसा मौसी के घर पटियाला गया था। उसके घर में कुल चार लोग हैं- मेरे मौसा, मौसी, उनका बेटा तरुण जो 21 साल का है और उसकी बेटी आशिमा जो 19 साल की है। मौसा मौसी दोनों ही एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में अच्छे पद पर हैं। उसके घर में पैसे की कोई कमी नहीं है। नौकर-चाकर, गाड़ी और शानो-शौकत की हर चीज़ घर में है। मेरे मौसा मौसी अपने दोनों बच्चों को समय नहीं दे पाते थे। आशिमा आशिमा हमेशा से ही अन्तर्मुखी रहने वाली और बहुत ही फेशनेबल है। उसके कोई खास सहेली या दोस्त नहीं थे और यह बात मुझे उसमें अजीब लगती थी।
मगर मुझे इसकी वजह तब समझ आ गई, जब मुझे यह पता लगा कि आशिमा के अपने ही भाई तरुण के साथ शारीरिक-सम्बन्ध हैं। आशिमा उस समय किसी पूर्णतया जवान कन्या जैसे शरीर की मालकिन थी। उनका कद 55″ और फिगर एकदम बढ़िया थी। मैं गर्मी की छुट्टियों में पटियाला आया था। दिन भर सैर की, फिर रात को भैया और आशिमा के साथ खाना खाकर अपने कमरे में सोने चला गया।
दस मिनट गुजरे होंगे, मुझे आशिमा के कमरे से किसी आदमी की आवाज़ आई। आशिमा का कमरा और मेरा कमरा सटा हुआ ही था। मुझे बड़ा अजीब लगा कि आशिमा इतनी रात को किस से बात कर रही है? मैंने सोचा कि शायद टीवी चल रहा है, मगर मुझे आशिमा की दबी हुई चीख और कुछ हंसने खिलखिलाने की आवाज़ आई, तो मेरे अन्दर कीड़ा काटने लगा, आखिर आशिमा किस से बात कर रही है? मेरे और आशिमा के कमरे के बीच में एक खिड़की थी। मैंने एक स्टूल दीवार के पास लगा लिया और स्टूल पर चढ़ गया। अन्दर का दृश्य देख कर मेरे होश फाख्ता हो गए।
मैंने देखा कि तरुण आशिमा के बिस्तर पर अधनंगी अवस्था में लेटा है और आशिमा उसकी कमर के ऊपर दोनों ओर पैर करके सवार है और बेतहाशा तरुण के शरीर को चूमे जा रही है। मैं इतना नादान नहीं था कि यह क्या चल रहा है, समझ न पाता।
तरुण के हाथ आशिमा की टी-शर्ट के अन्दर थे और उसकी छातियों से खेल रहे थे। मुझे बहुत हैरानी हुई के सगे भाई बहन इस अवस्था में कैसे एक दूसरे के साथ हो सकते हैं ऊपर से ये जाहीर था कि यह आशिमा की रजामंदी से हो रहा है और न ही वो नादान है। शायद आशिमा ने अपने अकेलेपन को तरुण के साथ ही मिटाने का फैसला कर लिया था।
मैं चुपचाप उसके खेल को देखने लगा। आशिमा ने तरुण के सर को पकड़ रखा था और अपने होठों को अपने बड़े भाई के होठों से चिपका कर चूमे जा रही थी। तरुण भी उतनी ही जोर से उसे अपने बदन से चिपटाए हुए था। आशिमा उसके होठों, माथे, गर्दन को चूमते हुए छाती की ओर आ गई। तरुण की छाती के घने बालों को सहलाते हुए चूमते चूमते वो पेट की तरफ पहुँच गई।
फिर आशिमा तरुण के ऊपर से उठ गई और उसने तरुण की तरफ देख कर हल्की रहस्यमयी मुस्कान दी। तरुण ने भी मुस्कुराते हुए अपनी छोटी बहन की तरफ देखा। आशिमा ने अपने हाथों से तरुण का अंडरवियर उतार कर उसे नंगा कर दिया, फिर उसके लिंग को पकड़ लिया।
तरुण के लिंग को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया। तरुण का लिंग करीब 9 इंच लम्बा और 2 इंच मोटे व्यास का था। आशिमा ने उसके लिंग और अंडकोष को प्यार से सहलाया। आशिमा के हाथ के स्पर्श से ही उसके शिथिल लिंग में कसाव बढ़ गया। आशिमा ने मुस्कुराते हुए लिंगमुंड को चूमा। फिर आशिमा ने तुरंत उसका लिंग-मुंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।
मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था, मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि लड़कियाँ इस तरह से मुखमैथुन करती हैं, वो कहते थे कि लड़कियों को ऐसा करना अच्छा लगता है, मगर मैं उसकी बातों को मजाक समझता था। मगर आशिमा को इस तरह से करते हुए देख मुझे यकीन हो गया कि सच में उसे मजा आ रहा है।
आशिमा उसके लिंग को मुँह के अन्दर लेते हुए ऊपर नीचे सर को चलाने लगी। तरुण का लिंग उसकी लार से सन गया था और चमकने लगा था। उसके लिंग की नसें तन गई थी। आशिमा उसके आधे लिंग को मुँह में अन्दर लेकर चूसती थी फिर लिंग मुंड को चूसती थी। उसका लिंग मुंड लाल रसभरी की तरह फूल गया था।
तरुण ने आशिमा के सर पर हाथ रख कर सर को लिंग की तरफ दबाया ताकि आशिमा और ज्यादा लिंग को मुँह के अन्दर ले ले। मगर आशिमा को खांसी आ गई। आशिमा ने लिंग को मुँह से बाहर निकाल कर नहीं की मुद्रा में सर हिलाया तो तरुण ने अपनी जिद छोड़ दी।
आशिमा ने उसके बाकी लिंग को बाहर से चाट चाट कर चूसा। करीब 5 मिनट चूसने के बाद तरुण का लिंग आशिमा ने छोड़ दिया। फिर उसकी कमर के दोनों तरफ पैर करके लिंग के ऊपर बैठकर अपनी कमर चलाने लगी।
तरुण उठकर बैठ गया और आशिमा को उसने ठीक से अपनी गोद में बैठा लिया। आशिमा ने उसकी गर्दन के चारो ओर अपने हाथों को लपेट लिया और तरुण के सर को अपने स्तनों के बीच दबा लिया। आशिमा अपनी कमर को वैसे ही तरुण के लिंग के ऊपर चला रही थी। आशिमा के चेहरे पर मस्ती की सुर्खी साफ़ नज़र आ रही थी क्योंकि उसकी योनि पर तरुण के लिंग की रगड़ उसे आनंदित कर रही थी। तरुण ने अपनी छोटी बहन की स्कर्ट को जाँघों तक ऊपर उठा दिया। आशिमा की दूधिया गोरी गोरी जांघें और पिंडलियों को तरुण सहलाने लगा। तरुण के हाथ सरकते हुए आशिमा के चूतड़ों तक पहुँच गए। आशिमा के चूतड़ों को उसने पकड़ कर उसने उसकी कमर को अपनी कमर से चिपटा लिया।
दो मिनट तक दोनों अपनी कमर को चलाते हुए अपने जननांगों को ऐसे ही रगड़ते रहे। दोनों ही मस्ती में सराबोर हो गए थे। तरुण ने आशिमा की टी-शर्ट को ऊपर की ओर उठा दिया। आशिमा के कोमल गौरे धड़ की एक झलक देखने को मिली। आशिमा ने अपने हाथ ऊपर को किये और तरुण ने उसकी टी-शर्ट को उतार कर फेंक दिया। अन्दर आशिमा ने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी।
मैंने जिंदगी में पहली बार किसी लड़की को इस रूप में देखा था, तो मैं भी उत्तेजना से कांप गया। आशिमा का पूरा शरीर जैसे किसी सांचे में ढाल के बनाया गया था। काली ब्रा में उसके शरीर की कांति और भी बढ़ गई थी। ब्रा के अन्दर आशिमा के बड़े बड़े स्तन कैद थे, जो बाहर आने को बेकरार लग रहे थे।
तरुण के हाथों ने तुरंत उसे अपने कब्जे में ले लिया और बड़ी बुरी तरह उसे मसला। आशिमा की ब्रा पारभासी थी, जिसकी वजह से में उसके गहरे रंग के निप्पल देख पा रहा था। मैंने कभी किसी के स्तनों को छूकर नहीं देखा था, मगर मैं तरुण को हो रहे उस गुदाज़ स्पर्श का आनंद महसूस कर सकता था। आशिमा दीदी के स्तन बहुत ही गुदाज़ थे, इसका अंदाजा इससे ही लग रहा था, जब जब तरुण उसे अपने कब्जे में ले लेता था, आशिमा की ब्रा के कप्स के साइड से स्तन का जो हिस्सा बाहर दिख रहा था, वो फूल जाता था।
तरुण ने आशिमा के स्तनों अग्र भाग को अपनी उँगलियों से चुटकियों से पकड़ कर गोल गोल घुमाया, तो आशिमा सिसिया उठी क्योंकि उसने आशिमा के निप्पल पकड़ लिए थे। उसने निप्पलों को जोर से मींसा तो आशिमा फिर से सिसिया उठी, मगर दर्द से। आशिमा ने अपने निप्पलों को तरुण के हाथों से छुड़ा लिया। आशिमा के निप्पल तन गए थे, जो की ब्रा में उभर आये थे। तरुण ने उन पर अपनी उँगलियों के पोर को गोल गोल नचाते हुए छेड़ा, तो आशिमा गुदगुदी के मारे फिर से सिसिया उठी।
जब गुदगुदी आशिमा से बर्दाश्त नहीं हुई तो वो तरुण के छाती से अपने स्तनों को चिपका कर लिपट गई। तरुण ने आशिमा की स्कर्ट के हुक खोले और फिर साइड चेन खोल कर स्कर्ट को उसके शरीर से अलग कर दिया। आशिमा ने अन्दर सफ़ेद रंग की पैंटी पहनी थी। तरुण ने उसकी जांघो के ठीक बीच में अपना हाथ फिराया और हल्के हल्के आशिमा के योनि प्रदेश को सहलाने लगा। आशिमा भी सिसियाते हुए उत्तेजित हो रही थी। तरुण ने उसकी ब्रा से स्तनों को बाहर निकाल लिया। आशिमा के स्तनों को नग्न देख कर मेरी हालत खराब हो गई। उसके स्तनों में कसाव था, तनिक भी लचक नहीं थी, गोरे गोरे स्तनों पर गहरे भूरे रंग के निप्पल बहुत ही प्यारे लग रहे थे।
तरुण ने आशिमा के एक स्तन को अपनी मुठ्ठी में कैद कर लिया और जोर जोर से दबाने लगा और दूसरे स्तन के निप्पल को अपने होठों में दबा कर चूसने लगा। आशिमा बहुत ही उत्तेजित हो गई थी, उसकी आँखें बोझिल और लाल हो गई थी। तरुण के सर को अपने हाथों से पकड़ कर उसका मुँह उन्होंने दूसरे निप्पल से सटा दिया, तरुण अपनी छोटी बहन की मन:स्थिति समझ गया और उसने दूसरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसकर इन्साफ किया। तरुण ने आशिमा के स्तनों को हल्के हल्के दांत से काटा, आशिमा थोड़ी थोड़ी देर में उसका सर पकड़ कर दूसरे तरफ के निप्पल की ओर ले जाती, जाहिर था आशिमा को मजा आ रहा था। और जब कभी तरुण जोर से स्तनों को काटता था, तो अपने स्तनों को उसके मुँह से छुड़ाकर बनावटी गुस्सा दिखाती थी, और फिर अगले ही पल अपना निप्पल तरुण के मुँह को समर्पित कर देती थी। तरुण ने काफी देर तक आशिमा का दूध पिया। आशिमा के स्तनों पर उसकी उँगलियों और दांतों के लाल निशान पड़ गए थे।
दोनों ही अब काफी उत्तेजित हो गए थे। तरुण ने आशिमा को बिस्तर पर बैठाया और खुद खड़ा हो गया। आशिमा के मुँह में उसने फिर से अपना लिंग डाला। आशिमा ने तुरंत लिंग को जोर जोर से चुसना शुरू कर दिया। दो मिनट चुसवाने के बाद तरुण ने लिंग को आशिमा के मुँह से खींच लिया। आशिमा ने दुबारा चूसने के लिए मुँह खोला, उससे पहले ही तरुण ने उसके कंधों को पीछे को धकेल कर उसे बिस्तर पर चित्त लिटा दिया। तरुण ने आशिमा की पैंटी की ईलास्टिक में उँगलियाँ फंसा कर पैंटी को उतार लिया, ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे उतार कर स्तनों को ब्रा की कैद से पूरी तरह विमुक्त कर दिया और फिर आशिमा की टांगों को फैला कर खुद बीच में लेट गया।
मैं शुरू में बस यह सोच रहा था कि आशिमा केवल हल्की-फुल्की मस्ती कर रही है, आशिमा शायद बस मुखमैथुन ही किया करती होगी मगर अब तो मुझे लग गया कि आशिमा तरुण के साथ, अपने सगे बड़े भाई के साथ, सेक्स करने के लिए तैयार है।
मुझे आशिमा की चिंता होने लगी कि कैसे वो इतना मोटा लिंग झेल पाएगी क्योंकि मेरे दोस्तों ने बताया था कि मोटा लिंग लड़की को शुरू में बेहिसाब दर्द देता है। तरुण ने आशिमा की योनि को सहलाया, फिर उस पर पास में पड़ी तेल की बोतल से तेल निकाल कर तेल लगाया। आशिमा की योनि एक छोटी सी दरार जैसी दिख रही थी। तरुण अपनी ऊँगली को योनि के अन्दर डालकर चलाता तो आशिमा मस्ती से सिसियाने लगती थी।
आशिमा की योनि को अच्छी तरह से तेल से मालिश कराने के बाद तरुण फिर से आशिमा की टांगों के बीच बैठ गया। तरुण ने आशिमा की योनि के मुँह पर अपना लिंग-मुंड टिकाया तो आशिमा की योनि के भगहोष्ट ऐसे खुल गए जैसे लिंग अन्दर लेने को तैयार बैठे हो। तरुण ने आशिमा की कमर को अपने मजबूत हाथों से पकड़ लिया। आशिमा ने भी उसकी कमर के चारों ओर अपनी टाँगें लपेट के घेरा बना कर जकड़ लिया। तरुण ने अपनी कमर को आशिमा की तरफ ठेल दिया।
तरुण का लिंगमुंड आशिमा की योनि के होठों को फैलाता हुआ अन्दर चला गया। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि कैसे इतना मोटा लिंग-मुंड आशिमा की संकरी सी योनि में अपनी जगह बना लिया। तरुण ने दुबारा कोशिश करके थोड़ा सा लिंग और अन्दर प्रवेश करा दिया। आशिमा हल्के हल्के सिसकारियाँ ले रही थी। फिर तरुण ने एक जोरदार झटका मारकर लिंग को काफी अन्दर तक अपनी छोटी बहन की योनि की गहराई तक अन्दर पंहुचा दिया कि आशिमा की चीख निकल आई।
मैंने आशिमा के चेहरे को देखा तो मैं समझ गया कि आशिमा को दर्द हो रहा है। तरुण ने दुबारा वैसा ही झटका मारा, तो आशिमा इस बार दर्द से दोहरी हो गई। आशिमा ने तरुण की गर्दन में अपने हाथ लपेट कर उसके मुँह को अपने सीने से चिपका लिया।
तरुण ने आशिमा के निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा और एक हाथ से उसके एक स्तन को जोर-जोर से भींचने लगा।
आशिमा एक मिनट में ही सामान्य नज़र आने लगी क्योंकि उसके मुँह से हल्की हल्की उत्तेजक सिसकारियाँ निकल रही थी और तरुण पर उन्होंने अपनी पकड़ ढीली कर दी थी। तरुण ने फिर से एक जबरदस्त शोट मारा आशिमा इस बार दहाड़ मार के चीख पड़ी।
आशिमा बोल पड़ी- दो मिनट रुक नहीं सकते ! मेरी जान निकली जा रही है दर्द के मारे ..स्स्स्स .स्सस्सस्सस
मैंने देखा कि इस बार आशिमा की आँखों में आँसू तक आ गए थे। मुझे ऐसा लगा कि तरुण उनका बलात्कार कर रहा है। तरुण ने एक बार सॉरी बोलकर आशिमा के होठों को अपने होठों से चिपका लिया और जोर-जोर से उसे चूमने लगा और साथ ही आशिमा के स्तनों को दबाने लगा। आशिमा भी उतनी तेजी से उसे चूम रही थी। तरुण हल्के हल्के अपनी कमर चला रहा था। अब आशिमा धीरे धीरे सामान्य होती लग रही थी। मुझे इतना समझ आया कि जब आशिमा को दर्द होता था, तरुण उसे उत्तेजित करके दर्द को ख़त्म कर देता था।
आशिमा ने अपने टांगो को जकड़ को अपने बड़े भाई तरुण की कमर के चारों ओर कस लिया।
तरुण ने आशिमा के होठों को छोड़ दिया और पूछा- अब डालूँ क्या? दर्द तो नहीं है ना?
आशिमा बोली- आराम आराम से डालो लेकिन ! जल्दी क्या है? मैं कोई भागे थोड़ी न जा रही हूँ?
तरुण बोला- मैं तो समझता हूँ, लेकिन यह नहीं समझता, यह पूरा अन्दर जाना चाहता है.. (उसका इशारा अपने लिंग की ओर था..)
आशिमा बोली- इसको बोलो, अपनी छोटी बहन को दर्द न दे, प्यार से धीरे धीरे करे न, तो छोटी बहन भी पूरा आराम से करने देगी।
अभी भी मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि क्या आशिमा अपनी योनि में तरुण का नौ इंची लिंग पूरा ले पाएगी? मुझे लगा शायद उत्तेजना की वजह से वो तरुण से ऐसी सेक्सी बातें कर रही होगी .. खैर..
तरुण ने अपनी पोजीशन ली। अपनी ऊँगली को आशिमा की योनि की तरफ ले गया और हल्के हल्के हाथ चलाते हुए कुछ सहलाने लगा। मैं ठीक से देख तो नहीं पा रहा था कि वो क्या सहला रहा है, मगर इतना देखा कि उसकी हरकत से आशिमा पागल हुए जा रही थी। आशिमा जोर-जोर से सिसिया रही थी और कह रही थी- भैया रुक जाओ ! भैया रुक जाओ ! अपने लिंग को अन्दर डालो !
मैंने देखा कि तरुण का आधा लिंग तो अभी भी आशिमा की योनि के बाहर था। आशिमा ने तरुण के हाथ को पकड़ कर उसकी हरकत को रोकना चाहा मगर तरुण ने अपनी हरकत को बंद नहीं किया बल्कि उसने एक जोरदार झटका मारकर अपना लिंग आशिमा की योनि में काफी अन्दर तक ठूंस दिया। इस बार आशिमा के मुँह से उफ़ भी नहीं निकली बल्कि वो आह.. सी.. स्स्स्ससस की आवाज़ें निकाल रही थी।
तरुण ने एक और झटका मारा तो आशिमा बोली- पूरा अन्दर गया न ! अगर बचा है तो वो भी डाल दो ! मुझे बहुत अच्छा लग रहा है !
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तरुण ने हरी झंडी देखकर तीन चार जोरदार शॉट मारे और अपना लिंग जड़ तक आशिमा की योनि में घुसा दिया और अपने होठों को आशिमा के होठों से चिपका कर उसके ऊपर चित्त लेटा रहा। आशिमा की आँखों में इस बार फिर से आंसू आ गए थे। मैं समझ गया अगर तरुण आशिमा के होठों को अपने होठों से सील नहीं करता तो आशिमा फिर से दहाड़ मार के चीखती।
दो मिनट तक वो वैसे ही उनको चूमते हुए उसके ऊपर लेटा रहा। फिर उसने अपनी कमर को धीरे धीरे गति दी। वो धीरे से कुछ इंच लिंग आशिमा की योनि से निकालता और फिर से उसे अन्दर प्रवेश करा देता। जब आशिमा के शरीर कुछ ढीला हुआ तो तरुण समझ गया कि अब उसे दर्द नहीं है। उसने आशिमा के होठों को आजाद कर दिया और उसकी आँखों में झांकते हुए पूछा- अब ठीक है?
आशिमा ने बस इतना कहा- जालिम, जान ले लो मेरी।
और आशिमा ने फिर से अपने बड़े भाई के होठों को अपने होठों से चिपका लिया। तरुण ने अब झटकों की गति और गहराई दोनों ही बढ़ा दी। आशिमा ने अपनी टाँगें ढीली कर ली। अब मैं वो नज़ारा साफ़ देख पा रहा था कि कैसे तरुण का नौ इंची पिस्टन आशिमा की योनि रूपी इंजिन में आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था। आशिमा की योनि का छल्ला उसके लिंग पर एकदम कसा हुआ था। आशिमा के चूतड़ के नीचे मैंने चादर को देखा तो वो भीगी हुई थी। दर असल आशिमा की योनि से कुछ द्रव रिस रहा था जो उसके चूतड़ों के बीच की घाटी से होते हुए नीचे चादर को भिगो रहा था। इस द्रव में भीग कर तरुण का लिंग भी चमक रहा था।
आशिमा ने तरुण के होठों को छोड़ दिया और जोरजोर से सिसिकारियाँ लेने लगी। आशिमा कमर को उठा-उठा कर तरुण के लिंग को पूरा पूरा अपनी योनि के अन्दर ले रही थी। तरुण भी अपने लिंग को लगभग पूरा बाहर निकाल कर वापस आशिमा की योनि में जड़ तक ठूंस देता था।
मुझे अपने दोस्तों द्वारा बताई गई दो बातों पर अब यकीन हो गया कि मोटा लिंग लड़की को घुसाते समय तकलीफ देता है मगर घुसाने के बाद उतना ही ज्यादा मजा भी देता है। मुझे यह बात समझ आ गई कि अगर संयम, उत्तेजना और समय तीनो चीजों का सही प्रयोग किया जाए तो कितना भी मोटा लिंग हो, वो लड़की की कसी से कसी योनि में प्रवेश कराया जा सकता है।
अचानक आशिमा में मैंने अजीब सा बदलाव देखा। आशिमा बहुत जोरजोर से सांस लेने लगी थी, उसके स्तन और निप्पल अकड़ गए थे। आशिमा के भगहोष्ट तरुण के लिंग के ऊपर फड़फड़ाते हुए खुल-बंद हो रहे थे।
आशिमा ने तरुण को अपने हाथो और टांगों की जकड़ में कैद कर लिया ताकि वो और झटके न मार पाए। आशिमा की योनि से एक तरल द्रव की धार निकल आई और नीचे बेडशीट को भिगोने लगी। मैंने पहली बार किसी लड़की का स्खलन देखा था। आशिमा स्खलित हो गई थी।
तरुण ने झटके और तेज मारने शुरू किये। दो मिनट में ही उसके शरीर में कम्पन शुरू हो गए और एक जोरदार शॉट के बाद वो आशिमा की टांगों के बीच धंस गया और वैसे ही अपनी छोटी बहन के ऊपर लेट गया। उसकी कमर में हल्के हल्के कम्पन दिख रहे थे। कुछ ही देर में उसका शरीर ढीला हो गया। काफी देर वो आशिमा के ऊपर लेटा रहा।
आशिमा उसकी गर्दन, कान और होठों को बार बार चूम रही थी और आत्मसंतुष्टि के भाव के साथ मुस्कुरा रही थी।
पाँच मिनट बाद आशिमा ने तरुण को अपने ऊपर से उठने को कहा। तरुण आशिमा के ऊपर से उठा उसने लिंग को आशिमा की योनि से बाहर निकाला। उसके लिंग से चिपचिपा सा द्रव टपक रहा था। लिंग के निकलते ही आशिमा की योनि से भी वो चिपचिपा द्रव यानि तरुण का वीर्य ढलक कर निकला और आशिमा के चूतड़ों की घाटी से होते हुए चादर पर गिर गया।
तरुण बगल में ही आशिमा के बिस्तर पर सुस्ताने लगा। आशिमा ने उसके लिंग को मुँह में ले लिया और चूस कर उस पर लगे वीर्य को साफ़ किया फिर चूस कर लिंग से वीर्य की आखरी बूँद तक निचोड़ ली। फिर आशिमा भी तरुण के बगल में लेट गई। दोनों एक दूसरे की तरफ मुँह करके करवट पर लेते हुए हल्के हल्के बतिया रहे थे।
मैं सोच रहा था कि अब भाई बहन की आज रात की कामक्रीड़ा पर विराम लगेगा। मगर ऐसा नहीं था, उनकी बातें सुनकर मेरा भ्रम दूर हो गया।
आशिमा तरुण के लिंग को हाथ में लेकर खेल रही थी, जो अब शिथिल होकर मात्र 6-7 इंच का रह गया था। तरुण उसके स्तनों और निप्पलों से खेल रहा था। वो हँसते मुस्कुराते हुए बातें कर रहे थे।
तरुण ने आशिमा से कहा- मजा आ गया आज रात ! और तुम्हें?
आशिमा- मुझे भी आया !
तरुण- दुबारा करोगी ?
आशिमा- बिल्कुल !
तरुण- तो पहले इसे तो खड़ा करो! (तरुण का इशारा अपने लिंग की तरफ था)
आशिमा- हो जाएगा, एक बार टायलेट हो आओ, मैं भी हो आती हूँ, दोनों तैयार हो जायेंगे।
तरुण- ठीक है !
इतना कह कर दोनों एक दूसरे से चिपट गए जैसे एक दूसरे को लील जायेंगे। आशिमा ने उस रात तरुण के साथ तीन बार कामक्रीड़ा की। तरुण सुबह नौ बजे तक उसके साथ ही सोया रहा।
रात में आशिमा की कामक्रीड़ा देखने के कारण मैं सुबह देर से जागा। सुबह उठते ही मैंने आशिमा के कमरे में रोशनदान से झाँका तो देखा, सुबह का कार्यक्रम भी चालू था।
मैंने देखा कि आशिमा अपने अन्तःवस्त्रों में ही बिस्तर पर उनींदी सी उल्टी लेटी हैं, तरुण आशिमा की जाँघों के ऊपर दोनों तरफ पैर करके बैठा है। तरुण नग्न था और उसका लिंग रात की तरह फिर से आगबबूला हो रहा था। तरुण आशिमा के बदन पर हाथ फिरा रहा था। आशिमा का शरीर तेल जैसी किसी चीज़ के लेप की वजह से कान्तिमान हो रहा था। दरअसल तरुण अपनी छोटी बहन के शरीर की तेल से मालिश कर रहा था। तरुण अपने हाथों को गोल गोल घुमाते हुए धीरे धीरे तेल को उसकी गर्दन से लेकर पीठ तक रगड़ रहा था।
तरुण ने आशिमा की पैंटी की इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ फंसाई और पैंटी को खींचकर घुटनों तक उतार दिया। उसके बाद वो आशिमा के चूतड़ों की मालिश करने लगा। आशिमा की टांगों को उठाकर उसने पैंटी को निकाल कर जमीन पर फेंक दिया और उसकी टांगों को थोड़ा सा फैलाकर फिर से आशिमा की जाँघों पर बैठ गया।
फिर उसने आशिमा दीदी की ब्रा का हुक खोल कर उसे भी खींचकर निकाल लिया। तरुण ने तेल की शीशी उठाकर आशिमा के चूतड़ों के बीच की घाटी में गिरा दी और हाथ से तेल को आशिमा की योनि पर फैलाने लगा। तरुण ने जब उँगलियों को आशिमा की योनि पर जोर-जोर से चलाना शुरू किया तो आशिमा की सिसकारी निकल आई।
तरुण और मैं दोनों ही समझ गए कि आशिमा जाग गई है और उत्तेजित हो गई हैं। तरुण ने तेल की शीशी को दबाकर तेल की धार अपने लिंग पर गिराई और तेल को पूरे लिंग पर फैला दिया। फिर लिंग को आशिमा की टांगों के ठीक बीच में अवस्थित करके आशिमा के ऊपर लेट गया। फिर उसने आशिमा की छातियों के नीचे अपने दोनों हाथ ले जाकर उसके स्तनों को पकड़ लिया और जोर-जोर से भींचने लगा। तरुण आशिमा के कान और गर्दन पर चुम्बन ले रहा था। आशिमा को मजा आ रहा था क्योंकि वो सिसियाते हुए हल्के-हल्के मुस्कुरा रही थी।
तरुण ने आशिमा के गालो का चुम्बन लिया तो आशिमा ने गर्दन घुमा कर अपने होठों को तरुण के होठों से चिपका लिया। दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे के होठों का रसपान किया। तरुण ने कमर को उठाकर लिंग को आशिमा की टांगों के बीच स्थापित किया और अपनी कमर को आशिमा की तरफ दबा दिया।
आशिमा के मुँह से दर्द भरी सिसकारी निकली। तरुण ने कमर को फिर से दबाया और आशिमा सिसियाते हुए चीखी- भैया दर्द हो रहा है धीरे धीरे करो प्लीज़।
मैं समझ नहीं पाया कि माजरा क्या है? अभी कुछ घंटे पहले ही आशिमा ने रात में जब तीसरी बार सम्भोग किया था तब तरुण ने पहले ही शाट में आधे से ज्यादा लिंग उसकी योनि में ठूंस दिया था, तब आशिमा “चूँ” भी नहीं बोली थी और पता नहीं अब उसे क्यों दर्द हो रहा है?
तरुण बोला- बस एक बार पूरा अन्दर चल जाए तो फिर उसके बाद दर्द नहीं होगा।
आशिमा बोली- नहीं, और मत डालो, मैं पूरा नहीं झेल पाऊंगी, इतने से ही कर लो।
तरुण- अभी तो बस टोपा ही अन्दर गया है, इतने में मजा नहीं आएगा।
आशिमा- दर्द से मेरी हालत खराब है, तुम कह रहे हो मजा नहीं आएगा?
तरुण- थोड़ा सा तो और डालने दो न, धीरे धीरे डालूँगा।
आशिमा- अच्छा, तेल और लगा लो।
तरुण ने अपना धड़ आशिमा के ऊपर से उठाया और आशिमा की टांगों को फैलाया और तेल की धार उसके चूतड़ों और अपने लिंग पर गिरा दी।
तरुण ने अपनी टाँगें आशिमा की टांगों के बीच में कर ली और अपनी टांगों को फैला लिया, इससे आशिमा की टाँगे भी चौड़ी फ़ैल गई। तरुण फिर से आशिमा के ऊपर लेटा और उसने अपने शरीर का वजन लिंग पर केन्द्रित करके आशिमा के ऊपर डाल दिया जिससे लिंग काफी अन्दर तक चला गया।
आशिमा चीखते हुए बोली- हाय भैया, मर गई मैं ! प्लीज़ मत करो, मैं नहीं झेल पा रही हूँ, पहली बार है ! और मत डालो प्लीज़ !
तरुण ने जब अपनी टाँगें फैलाई थी तब मैंने देखा कि उसने अपना लिंग आशिमा की योनि में नहीं, बल्कि गुदा में डाल रखा था और इसीलिए आशिमा इतना दर्द से तड़प रही थी।
मुझे समझ नहीं आया क्यों आशिमा गुदामैथुन के लिए तैयार हुई?
मुझे आशिमा की हालत पर तरस आ रहा था, मगर तरुण निर्दयी उस पर वैसे ही लदा हुआ था। वो आशिमा को जगह जगह चूम रहा था और उसके स्तनों को दबा रहा था।
मैं समझ गया तरुण फिर से संयम, समय और उत्तेजना में सामंजस्य बैठा रहा है।
तरुण ने पूछा- दर्द है अभी?
आशिमा- अभी है।
तरुण- हल्का हुआ है?
आशिमा- कुछ हल्का हुआ है !
तरुण- और डालूँ?
आशिमा- खबरदार, जो और डालने की बात की तो, तुम्हारी जिद के आगे मैं गुदामैथुन के लिए तैयार हो गई थी, अगर मुझे इस दर्द का पता होता तो कभी राजी नहीं होती।
तरुण- ठीक है, आज इतने से ही काम चलाता हूँ, कल पूरे के बारे में सोचेंगे।
आशिमा- कल से अगर गुदामैथुन का नाम भी किया न तो तुम्हें अपने बिस्तर से उठा कर फेंक आऊँगी।
तरुण- अभी एक बार जब मैं गाड़ी चलाऊँगा न, तब कहना मजा आया या नहीं ! मजा ना आये तो तु मेरी गाण्ड मार लेना।
आशिमा- तुम्हारी गाण्ड काहे से मारूँगी?
इस पर आशिमा और तरुण दोनों हंसने लगे।
तरुण ने आशिमा को करवट पे लिटा लिया और पीछे से हल्के हल्के लिंग को गुदा में चलाने लगा। तरुण ने एक हाथ को आशिमा की गर्दन के नीचे से ले जाकर उसके एक स्तन को पकड़ लिया और भींचने लगा। आशिमा की गुदा का छेद ऐसा लग रहा था जैसे उसमे कोई मोटा पाइप डाल दिया गया हो और उसकी गुदा एक छल्ले की तरह उस पाइप पर कस गई हो। तेल में भीग कर तरुण का लिंग बहुत ही वीभत्स लग रहा था।
तरुण आराम आराम से लिंग को आशिमा की गुदा के संकरे सुराख में चलाते हुए मजा ले रहा था। थोड़ी ही देर में आशिमा की गुदा उसके लिंग के लिए अभ्यस्त हो गई थी। बीच बीच में तरुण उत्तेजित होकर आशिमा की गुदा में कभी लिंग को अन्दर तक दबा देता था तो आशिमा हल्के से कसक पड़ती थी।
तरुण ने एक हाथ से आशिमा का एक निप्पल पकड़ लिया और उसे गोल गोल घुमाते हुए दबाने लगा और दूसरे हाथ से आशिमा के भगशिश्न को को छेड़ना चालू किया। आशिमा कुछ ही पलों में मस्ती से सराबोर हो गई थी। अब आशिमा आराम से उसके लिंग को ले पा रही थी।
तरुण ने झटकों की लम्बाई और गति दोनों बढ़ा दिए। आशिमा और तरुण दोनों के शरीर पसीने से भीग गए। उत्तेजना ने एक बार फिर से दर्द पर विजय पा ली थी।
आशिमा ने तरुण के हाथों को अपनी योनि से हटा दिया तो तरुण ने फिर से उसकी योनि को पकड़ लिया तो आशिमा बोली- भैया, मैं बहुत उत्तेजित हूँ और मैं झड झाऊँगी, योनि को और मत सहलाओ।
तरुण ने आशिमा के कान में कहा- मैं और अन्दर डालना चाहता हूँ !
आशिमा- मुझे दर्द होगा, मुझे इतने में मजा आ रहा है।
तरुण- पूरे में और ज्यादा मजा आएगा।
आशिमा- मैं इतने में ही खुश हूँ।
तरुण- मुझे मजा नहीं आ पा रहा है, प्लीज़ करने दो न। दर्द थोड़ा सा होगा फिर बिल्कुल ऐसे ही ख़त्म हो जाएगा।
आशिमा- ठीक है, तुम आराम से करना।
तरुण- नहीं, अगर मैं जल्दी से अन्दर डाल दूँगा तो अभी दर्द थोड़ी देर के लिए ही होगा, धीरे धीरे डालने से देर तक दर्द होगा, अभी तुम उत्तेजित हो तो दर्द को आराम से पी जाओगी।
आशिमा- बस देखना, मेरी जान नहीं निकलने पाए।
तरुण- छेद तो मैंने बंद कर रखा है कहाँ से निकल पाएगी?
इस पर दोनों हंसने लगे।
तरुण ने आशिमा की कमर को कसकर पकड़कर शाट मारा। तरुण का लिंग थोडा सा ही आशिमा की गुदा में गया। आशिमा ने हल्की सिसकारी ली। आशिमा ने अपनी आँखें बंद कर ली थी और होठों को भींच लिया था। साफ़ जाहिर था उसे हल्का दर्द तो अभी भी हो ही रहा था।
तरुण ने अगला धक्का जोर से लगाया। आशिमा इस बार दर्द से हल्का सा चीख ही पड़ी थी और कमर को आगे की तरफ खींचने लगी मगर तरुण ने उसकी कमर को जकड़ कर आगे नहीं बढ़ने दिया बल्कि अपने लिंग को आशिमा की गुदा में दबाये रखा।
आशिमा ‘आह आह’ कर रही थी।
तरुण ने आशिमा को दिलासा देते हुए कहा- बस जान ! थोड़ा सा ही बाकी है, एक बार और हिम्मत कर लो बस।
आशिमा ने कहा- बहुत दर्द कर रहा है।
तरुण- बस एक बार और होगा फिर नहीं होगा।
तरुण ने आशिमा को झूठी दिलासा दी थी, अभी कम से कम 3-4 इंच लिंग गुदा के बाहर ही था।
तरुण ने आशिमा के निप्पलों को दो मिनट सहलाया, आशिमा जब कुछ सामान्य सी हुई तो उसने आशिमा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
आशिमा एलर्ट हो गई। मैं समझ गया अबकी आशिमा की जान पर बन आनी है और वही हुआ।
तरुण ने पूरी जोर से जबरदस्त झटका मारा और लिंग को काफी अन्दर ठूंस दिया।
आशिमा चीखते हुए रोने लगी और जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए अपने को तरुण की जकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी, मगर उसकी कोशिश नाकाम रही।
तरुण ने बगैर देर किये दो और जबरदस्त धक्के मार कर अपना लिंग जड़ तक आशिमा की गुदा में ठूंस दिया। आशिमा ने बहुत संघर्ष किया मगर तरुण आशिमा की गुदा के ऊपर लद गया तो आशिमा का संघर्ष बेकार हो गया।
तरुण ने आशिमा की कमर को छोड़कर उसके स्तनों को पकड़ लिया और जोर जोर से भींचने लगा। आशिमा बहुत ही बुरी तरह रो रही थी। तरुण उसके कान और गर्दन पर चुम्बन लेते हुए उनका ढांढस बंधा रहा था।
तरुण आशिमा के ऊपर वैसे ही तब तक लेटा रहा जब तक आशिमा विरोध करती रही। जब आशिमा का शरीर ढीला पड़ गया और आशिमा का रोना बंद हो गया तो वो आशिमा के ऊपर से उतर के फिर से करवट पर आ गया।
आशिमा कुछ बोल नहीं रही थी। तरुण ने उसकी योनि को ऊँगली से सहलाते हुए उसे फिर से उत्तेजित करने की कोशिश की। एक हाथ से वो आशिमा के एक निप्पल को छेड़ रहा था, एक हाथ से आशिमा के भगोष्ठ को सहला रहा था और साथ ही एक निप्पल को मुँह में लेकर चूस रहा था।
यह मिली-जुली कोशिश थी आशिमा को जल्द से जल्द उत्तेजना देने की और उसकी कोशिश दो मिनट में ही रंग लाई। आशिमा हल्की-हल्की मस्ती से सिसियाने लगी थी। इसी के साथ तरुण ने अपने लिंग को आशिमा की गुदा में हल्के हल्के अन्दर बाहर मर्दन शुरू कर दिया। आशिमा अब पहले की तरह दर्द नहीं महसूस कर रही थी। शायद अब उसकी गुदा में तरुण के लिंग लायक जगह बन गई थी। तरुण ने भी कुछ देर मर्दन करने के बाद आयाम बढ़ा दिया। उसने २-३ इंच लिंग को बाहर खींच कर वापस आशिमा की गुदा में डाल दिया। आशिमा हल्के से सिसिया उठी। तरुण ने अगली बार अपना आधा लिंग निकाल कर आशिमा की गुदा में डाला। आशिमा इस बार भी वैसे ही सिसियाई मगर चीखी नहीं।
तरुण ने अपना दायरा तय कर लिया। वो अब धीरे धीरे आशिमा की गुदा में झटके मारने लगा। आशिमा मामूली सी तकलीफ के साथ तरुण का साथ दे रही थी। आशिमा उत्तेजित भी लग रही थी क्योंकि वो खुद अपनी योनि को अपनी उँगलियों से छेड़ रही थी।
तरुण भी आशिमा की कसी हुई गुदा पाकर काफी उत्तेजित हो गया। उसने झटकों की गति बढ़ा दी तो आशिमा ने उसे रोकते हुए कहा- भैया आराम से करो, मुझे तकलीफ हो रही है। मैं तुम्हारा साथ दे रही हूँ न, फिर तुम भी मेरा साथ दो न।
तरुण ने कहा- वो क्या है न, मस्ती में मैं काबू खो देता हूँ।
आशिमा ने कहा- तुम जब हल्के हल्के करते हो तो मुझे भी अच्छा लग रहा है।
तरुण- धीरे धीरे करूँगा तो मुझे झड़ने में बहुत वक्त लगेगा।
आशिमा- चाहे जितना समय लगे, मैं तुम्हारा साथ दूँगी, तुम मेरी भी मस्ती का ध्यान रखो न, प्यार का मजा मत खराब करो, आज पहली बार है न।
तरुण- तुम्हें अब मजा आ रहा है?
आशिमा- थोड़ा-थोड़ा।
तरुण- फिर ठीक है जान, तुम्हें पूरा मजा दूँगा।
तरुण ने वैसे ही धीरे धीरे झटके लगाते हुए आशिमा की गुदा को अपने लिंग से कूटना जारी रखा। आशिमा आराम से उसके लिंग को अब पूरा पूरा अपनी गुदा में बगैर तकलीफ के ले पा रही थी। तरुण आशिमा के स्तनों से खेलते हुए, उसके होठों का रसपान करते हुए, आशिमा की गुदा का आनन्द उठा रहा था।
दस मिनट बाद तरुण की साँसें गहराने लगी। उसने अचानक झटकों की गति बढ़ गई, उसने आशिमा के स्तनों को दबोच लिया और कांपते हुए अपना लिंग जड़ तक आशिमा की गुदा में ठूंस कर ठहर गया। आशिमा समझ गई की तरुण झड़ गया है। आशिमा ने उसके होठों को अपने होठों से चिपका लिया और उसे खूब जोर-जोर से चूमा।
पाँच मिनट बाद दोनों ने एक दूसरे को अपने अपने होठों के बंधन से मुक्त किया। तरुण काफी संतुष्ट और थका हुआ दिख रहा था। आशिमा हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी। उसका लिंग अभी भी आशिमा की गुदा में ही था।
आशिमा ने उस से कहा- अब इसे निकालोगे या मेरी गुदा में ही डाले रहोगे?
तरुण ने अपने लिंग को बाहर को खींचा। वीर्य से सना हुआ लिंग जब बाहर निकला तो वो शिथिल हो चुका था। आशिमा की गुदा का छेद तरुण के लिंग के निकलते ही फिर से पहले की तरह संकीर्ण हो गया। आशिमा ने उसके लिंग को मुँह में लेकर उस पर लगे वीर्य को चूस लिया।
तरुण ने आशिमा से पूछा- कैसा लगा?
आशिमा- अच्छा था।
तरुण- फिर से करोगी?
आशिमा- आज नहीं।
तरुण- क्यों?
आशिमा- दर्द कर रही है। पहली बार है न।
तरुण- धीरे धीरे करूँगा।
आशिमा- नहीं, पहले मेरी रानी का ख्याल करो, यह प्यासी है।
तरुण- ठीक है, रानी की बहन की सेवा हो गई, अब रानी की खातिरदारी की जाए, मगर अपने बड़े भाई को थोड़ा सा मौका तो दो।
आशिमा- अपने बड़े भाई को मैं अच्छी तरह तैयार करना जानती हूँ।
इतना कह कर आशिमा ने तरुण के हाथों को लाकर अपने स्तनों पर रख दिया और तरुण के लिंग पर बैठकर अपनी योनि को लिंग से रगड़ने लगी। तरुण आशिमा के स्तनों से खेलने लगा।
आशिमा- इन्हें खूब जोर से दबाओ।
तरुण आशिमा के स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगा। आशिमा के स्तनों पर उसकी उँगलियों के निशान पड़ने लगे थे। कुछ ही मिनटों बाद इधर आशिमा के स्तन लाल हो रहे थे और नीचे उसका लिंग और आशिमा की योनि फिर से क्रोध में लाल हो रहे थे।
आशिमा और तरुण ने एक बार और लिंग और योनि के घमासान को देखने का मौका दिया। उसके बाद दोनों शांत होकर सो गए।
मैं एक महीना मुंबई रुका था, मैंने हर रात आशिमा की अपने बड़े भाई के साथ कामक्रीड़ा का नज़ारा देखा।
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